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Offering namaaz in open spaces is actually unislamic

I didn't understand the recent row over offering namaaz in public spaces in Haryana and elsewhere in the country? What's wrong if the Muslims offering namaaz on road aren't stopped to do so? Only in the last two decades or so, this sanctimonious displaying mentality of the followers of all man-made faiths has become disturbingly obvious.

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take-off

  • BOLLYWOOD’S BEST SPY FILM ‘RAAZI’

     

    ‘Raazi’ a film based on real life incidence. The beautiful part of the film is, it directed by a lady film director Meghna Gulzar. She being a lady film director has given Dus Kahaniya, Just Married and Talvar as hits. They young talented and dynamic director has tied up with Dharma production for Raazi, it is one of the honorable

     
  • सड़कों पर नमाज क्यों नहीं?

    धर्म आस्था और आत्मोत्थान का माध्यम होता है। इसका प्रदर्शन यदि उत्सव के रूप में किया जाए, तो वह एक सामाजिक-सांस्कृतिक घटना मानी जाती है। जिसका सभी आनंद लेते हैं। चाहे विधर्मी ही क्यों न हों। दीपावली, ईद, होली, वैशाखी, क्रिसमस, पोंगल, संक्राति व नवरोज आदि ऐसे उत्सव हैं, जिनमें दूसरे धर्मों के मानने वाले भी उत्साह से भाग लेते हैं। अपने-अपने धर्मों की शोभा यात्राऐं निकालना,

     
  • सरकार मौन क्यों है ?

    पिछले वर्ष से तीन लेखों में हमने देश की सबसे बड़ी निजी ऐयरलाईंस जैट ऐयरवेज और भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के भ्रष्ट अधिकारियों की सांठ-गांठ के बारे में बताया था। इस घोटाले के तार बहुत दूर तक जुड़े हुए हैं। वो चाहे यात्रियों की सुरक्षा की बात हो या देश की शान माने जाने वाले महाराजा एयर इंडिया की बिक्री की बात हो। ऐसे सभी घोटालों में जैट ऐयरवेज का किसी न

     
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Poetry

  • Without Guilt

    Something exciting 
    was to happen.You 
    call for an assayer. 

    Morality has failed, 
    running after the 
    false values of untruths. 

    Pure virginity. 
    I won't touch you again 
    for the sake of god. 

    Crossing the threshold 
    like walking on burning coals 
    to test the bonding. 

    The mankind was 
    always cannibalistic. 
    You devour the body without blood.

     
  • Losing The Vision

    I left a piece of moon on my 
    table and started writing about 
    the broken mirror. There was a time 
    when we used to cry together. 

    Dusting off the old books, uncared 
    for months. A rare ritual 
    defines the motion. It was the 
    temblor giving me a dustbath. 

    Do you know who was the leader 
    of the pack? The greed, the authority? 
    There was a bright door, between 
    the umbels. Would you taste the hemlock? 

    Every thing is in disorder. You 
    remember how cranky I was when 
    I found you unframed. Today 
    I will embrace the empty wall.

     

Social Issues

सड़कों पर नमाज क्यों नहीं?

धर्म आस्था और आत्मोत्थान का माध्यम होता है। इसका प्रदर्शन यदि उत्सव के रूप में किया जाए, तो वह एक सामाजिक-सांस्कृतिक घटना मानी जाती है। जिसका सभी आनंद लेते हैं। चाहे विधर्मी ही क्यों न हों। दीपावली, ईद, होली, वैशाखी, क्रिसमस, पोंगल, संक्राति व नवरोज आदि ऐसे उत्सव हैं, जिनमें दूसरे धर्मों के मानने वाले भी उत्साह से भाग लेते हैं। अपने-अपने धर्मों की शोभा यात्राऐं निकालना,

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देश की संवेदना को सुलाने की कोशिश में 'जागरण' !

जम्मू के कठुआ में आठ साल की एक मासूम बच्ची आसिफा के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में उपलब्ध तमाम वैज्ञानिक सबूतों, प्रमाणों और तथ्यों को झुठलाते हुए अखबार 'दैनिक जागरण' ने अपने जम्मू सहित कई संस्करणों के हैडलाइन में जो खबर लगाई है, वह यह है - 'बच्ची के साथ नहीं हुआ दुष्कर्म' ! मनगढंत तथ्यों के आधार पर बनाई गई 'जागरण' की इस खबर

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हंगामा है क्यों बरपा !

एस.सी / एस.टी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के एक संशोधन के बाद कुछ दलित संगठनों द्वारा आज भारत बंद के आह्वान का समर्थन वस्तुतः क़ानून के राज का निषेध है। दलितों के अधिकार और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए बनाया गया यह कानून एक प्रगतिशील और ज़रूरी कदम था, लेकिन सच यह भी है कि इस क़ानून का दुरूपयोग भी बहुत हुआ है। इस क़ानून का ही क्यों, आई.पी.सी की धाराओं

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Politics

सरकार मौन क्यों है ?

पिछले वर्ष से तीन लेखों में हमने देश की सबसे बड़ी निजी ऐयरलाईंस जैट ऐयरवेज और भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के भ्रष्ट अधिकारियों की सांठ-गांठ के बारे में बताया था। इस घोटाले के तार बहुत दूर तक जुड़े हुए हैं। वो चाहे यात्रियों की सुरक्षा की बात हो या देश की शान माने जाने वाले महाराजा एयर इंडिया की बिक्री की बात हो। ऐसे सभी घोटालों में जैट ऐयरवेज का किसी न

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गोद में देश !

लाल किले को डालमिया द्वारा पच्चीस करोड़ में गोद लेने से भड़के हुए लोग सचमुच कितने भोले हैं न ! यहां कौन है जो किसी न किसी की गोद में नहीं बैठा है ? देश की सरकार को पिछले चौदह सालों से अंबानी ने गोद लिया हुआ है। देश की मीडिया सरकार की गोद में है। देश की लगभग तमाम संवैधानिक संस्थाओं को एक-एककर गोद लेने की रस्म सरकार पूरी कर ही रही है।

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राजनीति से असली मुद्दे नदारद

देश में हर जगह कुछ लोग आपको ये कहते जरूर मिलेंगे कि वे मोदी सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि मजदूर किसान की हालत नहीं सुधरी, बेरोजगारी कम नहीं हुई, दुकानदार या मझले उद्योगपति अपने कारोबार बैठ जाने से त्रस्त हैं, इन सबको लगता है कि 4 वर्ष के बाद भी उन्हें कुछ मिला नहीं बल्कि जो उनके पास था, वो भी छिन गया। जाहिर है

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Art & Culture

BOLLYWOOD’S BEST SPY FILM ‘RAAZI’

 

‘Raazi’ a film based on real life incidence. The beautiful part of the film is, it directed by a lady film director Meghna Gulzar. She being a lady film director has given Dus Kahaniya, Just Married and Talvar as hits. They young talented and dynamic director has tied up with Dharma production for Raazi, it is one of the honorable

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छोटी पहल, बड़ी बात

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि दिल्ली से विकास योजना का 100 रूपये जमीन तक पहुंचते-पहुंचते मात्र 14 रूपये रह जाते हैं, शेष भ्रष्टाचार की बलि चढ़ जाते हैं। 32 साल बाद वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी  यही बात दोहराई और  कोशिश की भ्रष्टाचार रूके और लोगों तक उनका हक पहुंचे। पर ये लड़ाई इतनी आसान नहीं है।

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नानक शाह फकीर फिल्म पर विवाद क्यों?

सिक्ख धर्म संस्थापक परमादरणीय गुरू नानक देव जी के जीवन व शिक्षाओं पर आधारित फिल्म ‘नानक शाह फकीर’ काफी विवादों में है। सुना है कि शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी और कुछ सिक्ख नेता इसे रिलीज नहीं होने देना चाहते। उनका कहना है कि गुरू नानक जी पर फिल्म नहीं बनाई जा सकती । क्योंकि उनका किरदार कोई मनुष्य नहीं निभा सकता।

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Editor's Pick

उज्जैन में होगा गुरूकुल शिक्षा का महाकुंभ

प्राथमिक शिक्षा किसी भी व्यक्ति, समाज और देश की बुनियाद को मजबूत या कमजोर करती है। इसीलिए गांधी जी ने बेसिक तालीम की बात कही थी। दुनिया के तमाम विकसित देशों में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। भारत के महानगरों में जो कुलीन वर्ग के माने-जाने वाले प्रतिष्ठित स्कूल हैं, उनके शिक्षकों की गुणवत्ता, सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि बाकी स्कूलों

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सितारों में हाकिंग !

 आधुनिक युग के महानतम वैज्ञानिक और ब्रह्मांड के कई रहस्यों को सुलझाने वाले खगोल विशेषज्ञ स्टीफेन हाकिंग के अवसान की ख़बर विज्ञान में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए किसी सदमे से कम नहीं। खबर सुनते ही कुछ अरसे पहले की उनकी एक भविष्यवाणी याद आ गई। उनका कहना था कि पृथ्वी पर हम मनुष्यों के दिन अब पूरे हो चले हैं। हम दस लाख साल बिता चुके हैं अपनी पृथ्वी पर।

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एक योद्धा आई.ए.एस. की प्रेरणास्पद जिंदगी

ब्रज परिक्रमा के विकास के लिए सलाह देने के सिलसिले में हरियाणा के पलवल जिले के डीसी. मनीराम शर्मा से हुई मुलाकात जिंदगी भर याद रहेगी। अपने 4 दशक के सार्वजनिक जीवन में लाखों लोगों से विश्वभर में परिचय हुआ है। पर मनीराम शर्मा जैसा योद्धा एक भी नहीं मिला। वे एक पिछडे गांव के, अत्यन्त गरीब, निरक्षर मजदूर माता-पिता की गूंगी-बहरी संतान हैं।

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