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बिन पानी सब सून !

जिस ईश्वर और जिन देवी-देवताओं को हमने कभी देखा-जाना नहीं हैं, उनके पीछे हम सब पागल है। उन काल्पनिक हस्तियों के मंदिरों, इबादतगाहों और स्तुतियों ने हमारे जीवन का ज्यादातर हिस्सा घेर रखा है। जो जीवित देवी-देवता हमारी आंखों के सामने अनंत काल से हमारे लिए सब कुछ लुटाते रहे हैं, यदि हमने उनकी भी इतनी ही चिंता की होती तो हमारी यह दुनिया आज स्वर्ग से भी सुन्दर होती।

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take-off

  • नानक शाह फकीर फिल्म पर विवाद क्यों?

    सिक्ख धर्म संस्थापक परमादरणीय गुरू नानक देव जी के जीवन व शिक्षाओं पर आधारित फिल्म ‘नानक शाह फकीर’ काफी विवादों में है। सुना है कि शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी और कुछ सिक्ख नेता इसे रिलीज नहीं होने देना चाहते। उनका कहना है कि गुरू नानक जी पर फिल्म नहीं बनाई जा सकती । क्योंकि उनका किरदार कोई मनुष्य नहीं निभा सकता।

     
  • हंगामा है क्यों बरपा !

    एस.सी / एस.टी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के एक संशोधन के बाद कुछ दलित संगठनों द्वारा आज भारत बंद के आह्वान का समर्थन वस्तुतः क़ानून के राज का निषेध है। दलितों के अधिकार और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए बनाया गया यह कानून एक प्रगतिशील और ज़रूरी कदम था, लेकिन सच यह भी है कि इस क़ानून का दुरूपयोग भी बहुत हुआ है। इस क़ानून का ही क्यों, आई.पी.सी की धाराओं

     
  • राजनीति से असली मुद्दे नदारद

    देश में हर जगह कुछ लोग आपको ये कहते जरूर मिलेंगे कि वे मोदी सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि मजदूर किसान की हालत नहीं सुधरी, बेरोजगारी कम नहीं हुई, दुकानदार या मझले उद्योगपति अपने कारोबार बैठ जाने से त्रस्त हैं, इन सबको लगता है कि 4 वर्ष के बाद भी उन्हें कुछ मिला नहीं बल्कि जो उनके पास था, वो भी छिन गया। जाहिर है

     
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Poetry

  • Not Prurient

    Becoming fiercly personal 
    with no physical contact, 
    the crescent moon 
    ultimately occults the Venus. 

    The grazer now turns into 
    fugitive. Was not the knower, 
    was not the known. 

    No past, no future, you 
    move with your eyes down 
    to deny the assault, the flirtation. 

    Your silence was 
    unthinkable. I will bring home 
    the dead. Light is gone. The 
    slapper sleeps. 

    In emotional agony I 
    start prowling for the body.

     
  • My Ignorance

    What happens when 
    you stop thinking? 
    Reaching near the god 
    or becoming a stone? 

    It was not enough even, 
    when you go in coma. 
    A shrine of dazzling failures. 

    The animosity, the politics 
    of violence.I cannot remain 
    untouched.Wounds would 
    never heal. 

    All fever.I am not alive. 
    of the marvels of religion. 
    I ask you to go away.This 
    Friday another Christ will die. 

    Becoming whole.Was it 
    possible today amidst the 
    unbecoming of human beings?

     

Social Issues

हंगामा है क्यों बरपा !

एस.सी / एस.टी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के एक संशोधन के बाद कुछ दलित संगठनों द्वारा आज भारत बंद के आह्वान का समर्थन वस्तुतः क़ानून के राज का निषेध है। दलितों के अधिकार और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए बनाया गया यह कानून एक प्रगतिशील और ज़रूरी कदम था, लेकिन सच यह भी है कि इस क़ानून का दुरूपयोग भी बहुत हुआ है। इस क़ानून का ही क्यों, आई.पी.सी की धाराओं

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एक लड़ाई आधी-अधूरी !

हमारे देश में कैंसर रोगियों की बढ़ती संख्या के मद्देनज़र विख्यात प्राकृतिक चिकित्सक और चिकित्सा लेखक डॉ अबरार मुल्तानी ने सरकार की कैंसर नीति के बारे में कुछ बहुत ज़रूरी सवाल उठाए हैं जिनपर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। सरकारी विज्ञापनों को देखें तो महसूस होगा कि कैंसर का एकमात्र या उसका सबसे बड़ा कारक तम्बाकू है। यह एक अर्द्धसत्य है।

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'पद्मावत' के बहाने

आज इक्कीसवीं सदी में भी काल्पनिक जातीय स्वाभिमान की बुनियाद पर खड़ी करणी सेना जैसी जातीय सेनाओं से जैसी मूर्खता और उद्दंडता की उम्मीद होती है, वह वैसा ही आचरण कर रही है। घटनाक्रम का दुखद पक्ष यह है कि करणी सेना के बहाने समूची राजपूत जाति को कायर बताकर लांछित और कलंकित करने का सुनियोजित अभियान सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा है।

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Politics

राजनीति से असली मुद्दे नदारद

देश में हर जगह कुछ लोग आपको ये कहते जरूर मिलेंगे कि वे मोदी सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि मजदूर किसान की हालत नहीं सुधरी, बेरोजगारी कम नहीं हुई, दुकानदार या मझले उद्योगपति अपने कारोबार बैठ जाने से त्रस्त हैं, इन सबको लगता है कि 4 वर्ष के बाद भी उन्हें कुछ मिला नहीं बल्कि जो उनके पास था, वो भी छिन गया। जाहिर है

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अबकी बार किसकी सरकार ?

उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर तथा बिहार की अररिया लोकसभा सीट पर भाजपा की असफलता को बहुत सारे लोग उसके अंत की शुरुआत मान रहे हैं। कुछ अति उत्साही मित्रों ने तो 2019 के चुनाव के बाद बाक़ायदा राहुल गांधी, मायावती या ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्ष की सरकार बनने की घोषणा भी कर दी है। मुझे लोगों की ऐसी भविष्यवाणियों पर भरोसा नहीं होता। पिछले कई

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क्या भ्रष्टाचार दूर करेंगे सुरेश प्रभु ?

नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कार्यभार सुरेश प्रभु को सौंप कर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सकारात्मक संकेत दिया है| उल्लेखनीय है कि यह मंत्रालय पिछले एक दशक से भ्रष्टाचार में गले तक डूबा हुआ है | हमने कालचक्र समाचार ब्यूरो के माध्यम से इस मंत्रालय के अनेकों घोटाले उजागर किये और उन्हें सप्रमाण सीबीआई और केन्द्रीय सतर्कता आयोग को लिखित रूप से सौंपा

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Art & Culture

नानक शाह फकीर फिल्म पर विवाद क्यों?

सिक्ख धर्म संस्थापक परमादरणीय गुरू नानक देव जी के जीवन व शिक्षाओं पर आधारित फिल्म ‘नानक शाह फकीर’ काफी विवादों में है। सुना है कि शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी और कुछ सिक्ख नेता इसे रिलीज नहीं होने देना चाहते। उनका कहना है कि गुरू नानक जी पर फिल्म नहीं बनाई जा सकती । क्योंकि उनका किरदार कोई मनुष्य नहीं निभा सकता।

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Ishika Mukherjee: new sensation

In this dreamy ideology a number of enriched vocalists have produced their remarkable stature of voice in engaging our national legacy already. Respected “Ishika Mukherjee” is one of them. She is the real iconic personality our “City of Joy”, Kolkata has ever produced not only to enlist her leading articulations but to pay her

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Most Heart-warming Session in Governor House

It is exclusively amazing to convey that Dr. Rudrarup Gupta, Academic Researcher and on the other hand he is the overseas privileged Author of lap Lambert International Publishing House, Germany and Overseas Reviewer of World Academy of science and Technology, USA. He has enriched our Management Research

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Editor's Pick

उज्जैन में होगा गुरूकुल शिक्षा का महाकुंभ

प्राथमिक शिक्षा किसी भी व्यक्ति, समाज और देश की बुनियाद को मजबूत या कमजोर करती है। इसीलिए गांधी जी ने बेसिक तालीम की बात कही थी। दुनिया के तमाम विकसित देशों में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। भारत के महानगरों में जो कुलीन वर्ग के माने-जाने वाले प्रतिष्ठित स्कूल हैं, उनके शिक्षकों की गुणवत्ता, सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि बाकी स्कूलों के शिक्षकों से कहीं ज्यादा बेहतर होती है। इन स्कूलों में पढाई के अलावा व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास पर ध्यान दिया जाता है। यही कारण है कि इन स्कूलों से निकलने वाले बच्चे दुनिया के पटल पर हर क्षेत्र में सरलता से आगे निकल जाते हैं, जबकि देश की बहुसंख्यक आबादी जिन स्कूलों में शिक्षा पाती है, वहां शिक्षा के नाम खानापूर्ति ज्यादा होती है। बावजूद इसके अगर इन स्कूलों से कुछ विद्यार्थी आगे निकल जाते हैं, तो यह उनका पुरूषार्थ ही होता है।

बात इतनी सी नहीं है, इससे कहीं ज्यादा गहरी है। आजादी के बाद से आज तक, कुछ अपवादों को छोड़कर व्यापक स्तर पर प्राथमिक शिक्षा की दशा और दिशा बदलने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया। पिछले दो वर्षों में तीन बार इसी काॅलम में मैं अहमदाबाद के उत्तम भाई के गुरूकुल शिक्षा को लेकर किये गये, अभूतपूर्व सफल प्रयोगों का उल्लेख कर चुका हूं। जिसकी विशेषता यह है कि आधुनिक मशीनों ,अग्रंेजी भाषा और सर्वव्यापी स्थापित पाठ्यक्रम का सहारा लिए बिना उत्तम भाई ने प्राचीन गुरूकुल पद्धति को पुर्नजागृत कर अभूतपूर्व मेधा के छात्र तैयार किये हैं। अब उनके इस सफल प्रयोग को ‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ’ ने पूरी तरह गोद ले लिया है। आगामी 28, 29 व 30 अप्रैल को मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर में, पौराणिक क्षिप्रा नदी के तट पर, मोहन भागवत जी की अध्यक्षता में गुरूकुल शिक्षा पद्धति पर तीनदिवसीय महाकुंभ होने जा रहा है। जिसमें दक्षिण एशिया के सभी गुरूकुलों के प्रतिनिधि और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े संघ के राष्ट्रीय स्तर के सभी चिंतक भाग लेंगे। जहां भारत में वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था की स्थापना की संभावनाओं पर गहरा मंथन होगा। चूंकि शिक्षा में परिवर्तन से जुड़े अनेक प्रयासों से गत 40 वर्षों से मैं एक पत्रकार नाते जुड़ा रहा हूँ, इसलिए इस विशेष महाकुंभ में भी जाकर देखूंगा कि इसमें से क्या रास्ता निकलता है।

यदि आपने चाणक्य सीरियल देखा था, तो आपको याद होगा कि महान आचार्य चाणक्य के, शिक्षा और गुरूकुल के विषय में, विचार कितने स्पष्ट और ओजस्वी थे। उनकी शिक्षा का उद्देश्य देशभक्त, सनातनधर्मी व कुशल नेतृत्व देने योग्य युवा तैयार करना था। पिछड़ी जाति के दासी पुत्र को स्वीकार कर ‘चन्द्रगुप्त मौर्य’ से मगध का सम्राट बनाने तक का उनका सफर इसी सोच का फल था। प्रश्न है कि क्या उज्जैन का महाकुंभ ऐसी ही शिक्षा पद्धति की स्थापना पर विचार कर रहा है?

भारत की सनातन पंरपरा में प्रश्न करने और शास्त्रार्थ करने पर विशेष बल दिया गया है। इसे शिक्षा के प्रारंभ से ही प्रोत्साहित किया जाता था। जबकि भारत में मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में इकतरफा शिक्षण की पंरपरा स्थापित हो गई है। शिक्षक कक्षा में आकर कुछ भी बोलकर चला जाए, विद्यार्थियों को समझ में आए या न आऐं, उनके प्रश्नों के उत्तर मिले या न मिले, इससे किसी को कुछ अंतर नहीं पढ़ता। केवल पाठ्यक्रम को  रटने और परीक्षा पास करने की शिक्षा दी जाती है। जबकि शिक्षा का उद्देश्य हमें तर्कपूर्णं और विवेकशील बनाना होना चाहिए। तर्क करने का उद्देश्य उद्दंडता नहीं होता, बल्कि अपनी जिज्ञासा को शांत करना होता है। श्रीमद्भगवद्गीता में अर्जुन को उपदेश देते हुए, भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं, ‘आत्मबोध प्राप्त गुरू की शरण में जाओ। अपनी सेवा से उन्हें प्रसन्न करो और फिर विनम्रता से जिज्ञासा करो। यदि वे कृपा करना चाहेंगे, तो तुम्हारे प्रश्नों का समाधान कर देंगे’। आधुनिक शिक्षा की तरह नहीं कि शिक्षक के सामने मेज पर पैर रखकर, सिगरेट का धुंआ छोड़ते हुए और अभद्रतापूर्णं भाषा में प्रश्न किया जाऐ।  ऐसा भी मैंने कुछ संस्थाओं में देखा है। गनीमत है अभी ज्यादातर संस्थाओं यह प्रवृत्ति नहीं आई है। यू तो हमारे भी शास्त्र कहते हैं कि सोलह वर्ष का होते ही पुत्र मित्र के समान हो जाता है और उससे वैसा ही व्यवहार करना चाहिए। पर इस मित्रता का आधार भी हमारी सनातन संस्कृति के स्थापित संस्कारों पर आधारित होना चाहिए। इससे समाज में शालीनता और निरंतरता बनी रहती है।

भारत भूमि में चर्वाक से लेकर बुद्ध तक सभी दाशर्निक धाराओं को जगह दी है। व्यापक दृष्टिकोण, मस्तिष्क की खिड़कियों का खुला होना, मिथ्या अंहकार से मुक्त रहकर विनम्रता किंतु दृढ़ता से दूसरी विचारधाओं के साथ व्यवहार करने का तरीका हमारी बौद्धिक परिपक्वता का परिचय देता है। दूसरी तरफ अपने विचारों और मान्यताओं से इतर भी अगर किसी व्यक्ति में कुछ गुण हैं, तो उनकी उपेक्षा करना या उन्हें सीखने के प्रति उत्साह प्रकट न करना, हमें कुऐं का मेंढक बना देता है। भारत के पतन का एक यह भी बड़ा कारण रहा है कि हमने विदेशी आक्रांताओं के आने के बाद अपनी शिक्षा, जीवन पद्धति और समाज की खिड़कियों को बंद कर दिया। परिणामतः शुद्ध वायु का प्रवेश अवरूद्ध हो गया। बासी हवा में सांस लेकर जैसा व्यक्ति का स्वास्थ्य हो सकता है, वैसा ही आज हमारे समाज का स्वास्थ्य हो गया है। उज्जैन का महाकुंभ क्या हमारी प्राथमिक शिक्षा को इस सड़ाँध से बाहर निकालकर शुद्ध वायु में श्वास लेने और सूर्य के प्रकाश से ओज लेने के योग्य बना पायेगा, यही देखना है।

 

सितारों में हाकिंग !

 आधुनिक युग के महानतम वैज्ञानिक और ब्रह्मांड के कई रहस्यों को सुलझाने वाले खगोल विशेषज्ञ स्टीफेन हाकिंग के अवसान की ख़बर विज्ञान में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए किसी सदमे से कम नहीं। खबर सुनते ही कुछ अरसे पहले की उनकी एक भविष्यवाणी याद आ गई। उनका कहना था कि पृथ्वी पर हम मनुष्यों के दिन अब पूरे हो चले हैं। हम दस लाख साल बिता चुके हैं अपनी पृथ्वी पर।

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एक योद्धा आई.ए.एस. की प्रेरणास्पद जिंदगी

ब्रज परिक्रमा के विकास के लिए सलाह देने के सिलसिले में हरियाणा के पलवल जिले के डीसी. मनीराम शर्मा से हुई मुलाकात जिंदगी भर याद रहेगी। अपने 4 दशक के सार्वजनिक जीवन में लाखों लोगों से विश्वभर में परिचय हुआ है। पर मनीराम शर्मा जैसा योद्धा एक भी नहीं मिला। वे एक पिछडे गांव के, अत्यन्त गरीब, निरक्षर मजदूर माता-पिता की गूंगी-बहरी संतान हैं।

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