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राज कुमार उर्फ़ कुलभूषण पंडित का मुंबई के माहिम थाने के थानेदार से फिल्मों में स्टारडम तक का सफ़र एक सपने जैसा रहा था। अपने व्यक्तिगत जीवन में आत्मकेंद्रित, अक्खड़ और रहस्यमय राज कुमार के अभिनय की एक अलग और विलक्षण शैली रही जो उनके किसी पूर्ववर्ती या समकालीन अभिनेता से मेल नहीं खाती थी। उनके अभिनय में विविधता चाहे न रही हो,

लेकिन यह सच है कि अपनी ज्यादातर फिल्मों में उन्होंने जिस अक्खड़, बेफिक्र और दंभ की सीमाएं छूते आत्मविश्वासी व्यक्ति का चरित्र जिया है, उसे जीना सिर्फ उन्हीं के बूते की बात थी। संवाद अदायगी की उनकी शैली भी सबसे जुदा रही थी। दिलीप कुमार, राज कपूर और देवानन्द के त्रिकोण में घुस कर अपना अलग मुकाम बनाने वाले राज कुमार को उस दौर में त्रिकोण का चौथा कोण कहा गया ! उनका अपना दर्शक वर्ग है जिसे आज भी उनकी कमी खलती है। उनके बाद अभिनेता नाना पाटेकर ने उनकी अभिनय शैली को अपनाया और कुछ हद तक सफल भी रहे। 1952 में ' रंगीली ' फिल्म से अपनी अभिनय यात्रा शुरू करने वाले राज कुमार ने पचास से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें कुछ प्रमुख फ़िल्में थीं - मदर इंडिया, दुल्हन, जेलर, दिल अपना और प्रीत पराई, पैगाम, अर्धांगिनी, उजाला, घराना, दिल एक मंदिर, गोदान, फूल बने अंगारे, दूज का चांद, ज़िन्दगी, वक़्त, पाकीजा, काजल, लाल पत्थर, ऊंचे लोग, हमराज़, नीलकमल, नई रौशनी, मेरे हुज़ूर, वासना, हीर रांझा, कुदरत, मर्यादा, सौदागर, हिंदुस्तान की कसम। अपने जीवन के आखिरी वर्षों में उन्हें कर्मयोगी, चंबल की कसम, तिरंगा, धर्मकांटा, जवाब जैसी कुछ फिल्मों में बेहद स्टीरियोटाइप भूमिकाएं ही निभाने को मिलीं। अपनी स्थापित छवि के विपरीत उनकी कुछ फिल्मों - मदर इंडिया, गोदान और दिल एक मंदिर ने यह साबित किया कि उनके अभिनय में विविधता की गुंजाईश है, लेकिन फिल्मकारों ने उनकी इस विविधता का इस्तेमाल बहुत कम किया ! इस विलक्षण अभिनेता की पुण्य तिथि (3 जुलाई) पर उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि, एक शेर के साथ !
वो आग था किसी बारिश का बुझा लगता था
अजीब शख्स था ख़ुद से भी ज़ुदा लगता था !

Courtesy: Dhruv Gupt

पत्थर से दिल लगाया और दिल पे चोट खाई !

यह संवेदनहीनता की इन्तेहा ही थी।बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में छेड़खानी की लगातार बढती घटनाओं और इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन की मूढ़ता और उदासीनता से परेशान विश्वविद्यालय की सैकड़ों लडकियां अपनी फ़रियाद सुनाने के लिए विश्वविद्यालय के गेट पर खड़ी दो दिनों के बनारस दौरे पर गए अपने सांसद और देश के प्रधानमंत्री मोदी की बाट जोहती रही।

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MICHAEL JACKSON A PRODIGY

Michael Jackson was always a mystery to his fans and critics.  MJ had an enigmatic personality; his death was a shrouded mystery.  He gave us a music which has no parallel Chandra till the date he was practicing music till 48 hours before he die. The last decade of his life became murky for all the hearsay and rumors.

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गौरी लंकेश के बहाने

 

दुनिया की कोई भी विचारधारा या कोई भी धर्म एक इंसानी जान से ज्यादा कीमती नहीं हो सकते,लेकिन दुर्भाग्य से दुनिया में सबसे ज्यादा इंसानी हत्याएं धर्म या विचारधारा के नाम पर ही हुई है। आधुनिक विश्व में विचारधारा के नाम पर क़त्लेआम का सबसे वीभत्स रूप वामपंथ ने दिखाया है।

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