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हिन्दी सिनेमा के सौ साल से ज्यादा लम्बे इतिहास में जिन अभिनेताओं ने अभिनय को नए आयाम दिए और नई परिभाषाएं गढ़ी, उनमें स्वर्गीय संजीव कुमार उर्फ़ हरिभाई जरीवाला एक प्रमुख नाम है। अपने भावप्रवण चेहरे, विलक्षण संवाद-शैली और अभिनय में विविधता के लिए विख्यात संजीव कुमार एक बेहतरीन अभिनेता ही नहीं, अभिनय के एक स्कूल माने जाते हैं।

जब भी हिंदी फिल्मों में अभिनय के कुछ मीलस्तंभ गिने जाएंगे, 'कोशिश' का गूंगा-बहरा किरदार, 'दस्तक' का एक परेशान पति, 'आंधी' की महत्वाकांक्षी पत्नी का वह परित्यक्त पति, 'शोले' का अपना सब कुछ खो चुका बेबस अपाहिज ठाकुर और 'खिलौना' का पागल प्रेमी कैसे भुला दिए जाएंगे ? फिल्म 'नया दिन नई रात' में नौ रसों पर आधारित अपनी नौ अलग भूमिकाओं में उन्होंने साबित किया कि अभिनय को जीवन के इतना भी क़रीब ले जाया जा सकता है। इस फिल्म के निर्देशक ए भीमसिंह पहले दिलीप कुमार के पास गए थे। दिलीप कुमार ने एक साथ नौ भूमिकाओं के लिए उन्हें संजीव कुमार का नाम ही नहीं सुझाया, बल्कि फिल्म के आरंभ में एक मिनट के लिए आकर संजीव कुमार को दर्शकों से इंट्रोड्यूस भी कराया। यह संजीव कुमार का बड़ा सम्मान था ! कई छोटी और दूसरे-तीसरे दर्ज़े की फिल्मों से अपना सफ़र शुरू करने वाले संजीव की नायक के रूप में पहली फिल्म थी 1965 में बनी 'निशान',लेकिन 1970 की फिल्म 'खिलौना' ने पहली बार उन्हें संवेदनशील अभिनेता के रूप में स्थापित किया। संजीव कुमार ने कभी अपने रोल की लंबाई नहीं देखी। उन्हें छोटी-छोटी भूमिकाओं में भी बड़े-बड़े प्रभाव छोड़ने की कला मालुम थी। नायक से ज्यादा चरित्र और सहायक भूमिकाओं में उनकी अदायगी निखर कर आती थी। उनकी कुछ प्रमुख फिल्में हैं - दस्तक, सत्यकाम, गृहप्रवेश, अनुभव, मौसम, आंधी, ज़िन्दगी, अर्जुन पंडित, संघर्ष, देवता, परिचय, सवाल, त्रिशूल, फरार, पति पत्नी और वो, नया दिन नई रात, शोले, कोशिश, पारस, चरित्रहीन, मुक्ति, विश्वासघात, नौकर, विधाता, अंगूर, सीता और गीता, आप की कसम, सिलसिला, नमकीन, शतरंज के खिलाड़ी, धरती कहे पुकार के, अनोखी रात, जानी दुश्मन, मनचली, अनामिका और मनोरंजन। गुलज़ार के वे सर्वाधिक प्रिय अभिनेता थे जिनके साथ उन्होंने नौ फिल्में की। सत्यजित रे ने जब अपनी पहली हिंदी फिल्म 'शतरंज के खिलाड़ी' बनाई तो उसके नायक संजीव कुमार बने। हेमा मालिनी और सुलक्षणा पंडित के साथ अपनी अधूरी प्रेम कहानियों का यह असफल नायक आजीवन अविवाहित रहा।
संजीव कुमार की जन्मतिथि (9 जुलाई} पर हमारी विनम्र श्रद्धांजलि !

Courtesy: Dhruv Gupt

PRESS RELEASE OF AETM 2018

Research education is having an ageless impression for its most dynamic future and it is exclusively notable for the researchers to find the indelible discovery. 4th International Conference on Advancements in Engineering, Technology and Management has taken place at “The Ten, Eastin Hotel, Makassan, Bangkok, Thailand,

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चुनावी माहौल में उलझते बुनियादी सवाल

2019 के चुनावों की पेशबंदी शुरू हो गयी है। जहां एक तरफ भाजपा भविष्य के खतरे को देखते हुए रूठे साथियों को मनाने में जुटी है, वहीं विपक्षी दल आपसी तालमेल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। दोनों ही पक्षों की तरफ से सोशल मीडिया पर मनोवैज्ञानिक युद्ध जारी है। जहां भाजपा का सोशल मीडिया देशवासियों को मुसलमानों का डर दिखाने में जुटा है, वहीं  विपक्षी मीडिया, जो अभी कम आक्रामक

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मोदी जी की साफ नीयत: सही विकास

राजनेताओं द्वारा जनता को नारे देकर, लुभाने का काम लंबे समय से चल रहा है। ‘जय जवान-जय किसान’, ‘गरीबी हटाओ’, ‘लोकतंत्र बचाओ’, ‘पार्टी विद् अ डिफरेंस’ व पिछले चुनाव में भाजपा का नारा था, ‘मोदी लाओ-देश बचाओ’। जब से मोदी जी सत्ता में आऐ हैं, भारत को परिवर्तन की ओर ले जाने के लिए उन्होंने बहुत सारे नये नारे दिये, जिनमें से एक है, ‘साफ नीयत-सही विकास’।

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