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भारतीय फिल्म संगीत में नया अंदाज़, नई अदा, नए तेवर, नया उल्लास और नए दर्द रचने वाले हिंदुस्तानी, कर्नाटक और पाश्चात्य सुरों के जादूगर ए.आर.रहमान का नाम आज पूरी दुनिया में सम्मान के साथ लिया जाता है। भारतीय और पाश्चात्य संगीत के मेल से रहमान ने सुरों का एक ऐसा तिलिस्म रचा जो एक साथ पुरानी और नई दोनों पीढ़ियों को अपने साथ बहाकर ले गया।

उनका संगीत सुनना कभी नदी की शांत लहरों में खामोश बहने का एहसास है और कभी भावनाओं के ज्वारभाटे के साथ उछलने-गिरने का रोमांच। मलयाली फिल्मों के संगीतकार पिता आर.के शेखर की इस संतान का 11 साल की उम्र में अपने मित्र शिवमणि के साथ 'बैंड रुट्स' के लिए की-बोर्ड बजाने से लेकर फिल्म संगीत के उच्चतम शिखर तक की यात्रा किसी परीकथा की तरह रोमांचक लगती है। फिल्मकार मणि रत्नम की फिल्मों - रोजा, बॉम्बे, दिल से, गुरु आदि ने शुरुआत में उन्हें वह आकाश दिया जहां उन्होंने ऊंची-ऊंची उड़ाने भरी। अपने छोटे से संगीत कैरियर में चार राष्ट्रीय और पंद्रह फिल्मफेयर पुरस्कारों के अलावा दो ग्रैमी पुरस्कार, गोल्डन ग्लोब अवार्ड और एक ऑस्कर हासिल करने वाले रहमान पहले भारतीय हैं। रोजा, बॉम्बे, दिल से, रंगीला, साथिया, सपने, ताल, पुकार, लगान, फिज़ा, जुबैदा, गुरू, रांझना, स्वदेश, रंग दे बसंती, जोधा अकबर, राकस्टार, गजनी, स्लमडाग मिलेनियर, जाने तू या जाने ना, देलही 6, रोबोट, राँझना और हाईवे उनकी प्रमुख हिंदी फिल्में हैं। अपनी फिल्मों में कुछ बेहतरीन गाने उन्होंने खुद भी गाए हैं - ओ हमदम तेरे बिना क्या जीना (गुरू), बंजर है सब बंजर है (साथिया), लुक्का-छिप्पी बहुत हुई और रूबरू रौशनी (रंग दे बसंती), ये जो देश है तेरा (स्वदेश), ख्वाजा मेरे ख्वाजा (जोधा अकबर) और दिल से रे (दिल से)।

भारत की शान रहमान को जन्मदिन (6 जनवरी) की ढेरों बधाईयां और शुभकामनाएं !

Courtesy: Dhruv Gupt

नानक शाह फकीर फिल्म पर विवाद क्यों?

सिक्ख धर्म संस्थापक परमादरणीय गुरू नानक देव जी के जीवन व शिक्षाओं पर आधारित फिल्म ‘नानक शाह फकीर’ काफी विवादों में है। सुना है कि शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी और कुछ सिक्ख नेता इसे रिलीज नहीं होने देना चाहते। उनका कहना है कि गुरू नानक जी पर फिल्म नहीं बनाई जा सकती । क्योंकि उनका किरदार कोई मनुष्य नहीं निभा सकता।

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राजनीति से असली मुद्दे नदारद

देश में हर जगह कुछ लोग आपको ये कहते जरूर मिलेंगे कि वे मोदी सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि मजदूर किसान की हालत नहीं सुधरी, बेरोजगारी कम नहीं हुई, दुकानदार या मझले उद्योगपति अपने कारोबार बैठ जाने से त्रस्त हैं, इन सबको लगता है कि 4 वर्ष के बाद भी उन्हें कुछ मिला नहीं बल्कि जो उनके पास था, वो भी छिन गया। जाहिर है

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Ishika Mukherjee: new sensation

In this dreamy ideology a number of enriched vocalists have produced their remarkable stature of voice in engaging our national legacy already. Respected “Ishika Mukherjee” is one of them. She is the real iconic personality our “City of Joy”, Kolkata has ever produced not only to enlist her leading articulations but to pay her

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