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चीन द्वारा सिक्किम में नाथूला सीमा पर कैलाश मानसरोवर के यात्रियों को रोकने की घटना विस्तारवादी चीन की दबंग कूटनीति का हिस्सा है। इसे उसकी भावनात्मक ब्लैकमेलिंग भी कहा जा सकता है जिसके माध्यम से वह सिक्किम और भूटान के क्षेत्र से गुजरने वाली अपनी निर्माणाधीन सड़क पर भारत के विरोध को कमज़ोर करना चाहता है। सिक्किम ही क्यों, भारत की आज़ादी

के बाद चीन उत्तराखंड, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के भी कई हिस्सों पर अपना दावा ठोकता रहा है। अपने दावों के समर्थन में उसके पास एतिहासिक और सांस्कृतिक दस्तावेज़ भी हैं। यह सही है कि भारत और चीन के बीच सीमाओं का निर्धारण कभी हो ही नहीं पाया। वहां सब कुछ कामचलाऊ ही है। चीन की दबंगई की वज़ह से बातचीत और सीमाओं के निर्धारण की कई कोशिशें नाकाम हो चुकी है। लेकिन सच यह भी है कि सीमाओं की अस्पष्टता की हालत में भारत के तमाम क्षेत्रों पर दस्तावेजों के आधार पर आज तक चीन ही दावा करता रहा है। भारत की भूमिका इस मसले पर हमेशा रक्षात्मक ही रही है। भारत चाहता तो चीन को वार्ता के टेबुल पर लाने के लिए ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक साक्ष्यों के आधार पर चीन के कुछ भाग पर दावा कर सकता था। कैलाश मानसरोवर उनमें से एक है। यह क्षेत्र हज़ारों वर्षों से भारतीय संस्कृति का केंद्र और हिन्दुओं के देवता भगवान शिव, देवी पार्वती, गणेश और कार्तिकेय का आवास रहा है। धार्मिक, सांस्कृतिक या ऐतिहासिक आधार पर चीन का इस क्षेत्र पर कोई दावा नहीं बनता। वैसे तो प्राचीन काल से समूचा तिब्बत ही चीन के बजाय भारतीय संस्कृति के ज्यादा निकट रहा है। अपनी भीरुता के कारण भारत ने इसपर दलाई लामा की निर्वासित सरकार की जगह चीन की प्रभुता स्वीकार कर ली थी।
क्या आपको नहीं लगता कि चीन की आक्रामक सीमा-नीति को देखते हुए हमें भी कम से कम कैलाश मानसरोवर पर साक्ष्यों के आधार पर थोड़ी आक्रामकता दिखानी चाहिए ?

Courtesy: Dhruv Gupt

योगी आदित्यनाथ जी हकीकत देखिए !

ऑडियो विज्युअल मीडिया ऐसा खिलाड़ी है कि डिटर्जेंट जैसे प्रकृति के दुश्मन जहर को ‘दूध सी सफेदी’ का लालच दिखाकर और शीतल पेय ‘कोला’ जैसे जहर को अमृत बताकर घर-घर बेचता है, पर इनसे सेहत पर पड़ने वाले नुकसान की बात तक नही करता । यही हाल सत्तानशीं होने वाले पीएम या सीएम का भी होता है ।

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तुम्हारा वह अंदाज़ याद रहेगा, ठाकुर !

हिन्दी सिनेमा के सौ साल से ज्यादा लम्बे इतिहास में जिन अभिनेताओं ने अभिनय को नए आयाम दिए और नई परिभाषाएं गढ़ी, उनमें स्वर्गीय संजीव कुमार उर्फ़ हरिभाई जरीवाला एक प्रमुख नाम है। अपने भावप्रवण चेहरे, विलक्षण संवाद-शैली और अभिनय में विविधता के लिए विख्यात संजीव कुमार एक बेहतरीन अभिनेता ही नहीं, अभिनय के एक स्कूल माने जाते हैं।

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मोदी की इजराइल यात्रा के निहितार्थ !

फिलिस्तीन और इजरायल के बीच तनाव और संघर्ष के कई दौर मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में एक है। उनकी लड़ाई में हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं जिनमें ज्यादातर बेगुनाह नागरिक और मासूम बच्चे शामिल हैं। मसला दोनों के अस्तित्व से ज्यादा ऐतिहासिक वजहों से उनके बीच सदियों से पल रही बेपनाह नफरत का है।

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