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आज फेसबुक पर ही एक मित्र ने अफगान स्नो का एक बहुत ही पुराना विज्ञापन पोस्ट किया तो बचपन की बहुत सारी स्मृतियां उभर आईं। अफगान स्नो स्त्रियों के लिए किसी कारखाने में बना देश का पहला सौन्दर्य प्रसाधन था। सफ़ेद-सफ़ेद रुई के फाहों जैसा खुशबूदार फेस क्रीम। 1909 में बम्बई में इसका उत्पादन शुरू किया था सुगन्धित तेल

और इत्र के एक व्यापारी इब्राहिम.पटनवाला ने। दशकों तक सौन्दर्य प्रसाधन के बाज़ार में इस उत्पाद का एकछत्र राज रहा। तब अखबार कम थे और विज्ञापन भी बहुत कम छपते थे। उस दौर की मशहूर फिल्मी नायिकाओं के साथ अफगान स्नो का विज्ञापन हमारे दिलों में एक तिलिस्मी कौतूहल जगाता था। पिछली सदी के छठे दशक में यह स्नो हमारे गांव में भी पहुंच गया था। तब मां और बड़ी बहनों के कमरों में यह एकमात्र सौन्दर्य प्रसाधन हुआ करता था। महंगा होने की वज़ह से कुछ ख़ास अवसरों पर ही वे इसका इस्तेमाल करती थीं। इसकी ख़ुशबू मुझे बहुत पसंद थी। चोरी-चोरी कभी-कभार चेहरे पर मल भी लिया करता था। चेहरा थोड़ा सफ़ेद तो होता ही था, घंटों इसकी ख़ुशबू का आनंद अलग से। पकड़े जाने पर अक्सर उपहास का पात्र भी बनना पड़ता था। अब अफगान स्नो किसी घर में नज़र नहीं आता।बाज़ार में शायद यह उपलब्ध है, लेकिन आधुनिक सौन्दर्य प्रसाधनों की भीड़ में अपना वजूद और आकर्षण खो बैठा है। आज की पीढ़ी को शायद ही इसके बारे में कुछ पता हो, लेकिन हमसे पहले वाली और हमारी पीढ़ी के दिल और दिमाग में इसकी यादें अब भी सलामत है।
आख़िर पहला प्यार तो पहला प्यार ही होता है न !

Courtesy: Dhruv Gupt

योगी आदित्यनाथ जी हकीकत देखिए !

ऑडियो विज्युअल मीडिया ऐसा खिलाड़ी है कि डिटर्जेंट जैसे प्रकृति के दुश्मन जहर को ‘दूध सी सफेदी’ का लालच दिखाकर और शीतल पेय ‘कोला’ जैसे जहर को अमृत बताकर घर-घर बेचता है, पर इनसे सेहत पर पड़ने वाले नुकसान की बात तक नही करता । यही हाल सत्तानशीं होने वाले पीएम या सीएम का भी होता है ।

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तुम्हारा वह अंदाज़ याद रहेगा, ठाकुर !

हिन्दी सिनेमा के सौ साल से ज्यादा लम्बे इतिहास में जिन अभिनेताओं ने अभिनय को नए आयाम दिए और नई परिभाषाएं गढ़ी, उनमें स्वर्गीय संजीव कुमार उर्फ़ हरिभाई जरीवाला एक प्रमुख नाम है। अपने भावप्रवण चेहरे, विलक्षण संवाद-शैली और अभिनय में विविधता के लिए विख्यात संजीव कुमार एक बेहतरीन अभिनेता ही नहीं, अभिनय के एक स्कूल माने जाते हैं।

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मोदी की इजराइल यात्रा के निहितार्थ !

फिलिस्तीन और इजरायल के बीच तनाव और संघर्ष के कई दौर मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में एक है। उनकी लड़ाई में हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं जिनमें ज्यादातर बेगुनाह नागरिक और मासूम बच्चे शामिल हैं। मसला दोनों के अस्तित्व से ज्यादा ऐतिहासिक वजहों से उनके बीच सदियों से पल रही बेपनाह नफरत का है।

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