Menu

User Rating: 0 / 5

Star InactiveStar InactiveStar InactiveStar InactiveStar Inactive
 

बुद्ध की कथाओं की सुजाता को हम उस स्त्री के तौर पर ही जानते हैं जिसने कठोर तपस्या के कारण मरणासन्न बुद्ध को खीर खिलाकर उन्हें नया जीवन और जीवन के प्रति संतुलित दृष्टि दी थी। इस एक प्रसंग के कारण सुजाता का गौतम को बुद्ध बनाने में बड़ा योगदान माना जाता है । इस प्रसंग के अतिरिक्त भी बौद्ध-ग्रंथों में सुजाता के जीवन, उसके ह्रदय परिवर्तन और अंत के बारे में भी कुछ सूचनाएं हैं जिनसे

ज्यादा लोग परिचित नहीं। सुजाता बोधगया के पास सेनानी ग्राम के एक साहूकार अनाथपिण्डिका की पुत्रवधू थी। अत्यंत अहंकारी, वाचाल और उद्दंड। पति और ससुराल के लोगों से उसका रिश्ता बहुत कटु था। एक अरसे तक उसे संतान की प्राप्ति नहीं हुई तो उसने मनौती मांगी थी कि पुत्र होने के बाद वह गांव के निकट के पीपल वृक्ष-देव को खीर चढाएगी। संयोग से इस मनौती के बाद उसे एक पुत्र की प्राप्ति हुई। पुत्र होने के बाद उसने एक दिन अपनी दासी पूर्णा को पूजा के पहले वृक्ष के आसपास की जगह की सफाई के लिए भेजा। पूर्णा वृक्ष नीचे तपस्या में रत कृशकाय बुद्ध को देखकर उन्हें वृक्ष का देवता समझ बैठी। उसने भागकर सुजाता को यह सूचना दी। सुजाता ने वहां पहुंचकर बुद्ध को देखा। उनका परिचय पूछा। उनकी जर्जर हालत देखकर उन्हें खीर और शहद अर्पण करते हुए कहा- ‘जैसे मेरी पूरी हुई, आपकी भी मनोकामना पूरी हो।' मरणासन्न बुद्ध ने नदी में स्नान करने के बाद खीर खाकर उनचास दिनों का अपना उपवास तोड़ा। उस दिन बुद्ध को लगा कि तपस्या की अति में वे आजतक अपनी देह से अनाचार ही करते रहे थे। उस देह से जो ज्ञान तक ले जाने की सीढ़ी है। पहली बार उन्हें बोध हुआ कि अति किसी भी वस्तु की ठीक नहीं - न भोग की, न योग की। जिस पीपल वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ को यह बोध मिला वह बोधिवृक्ष कहलाया और गया नगर के पास का वह क्षेत्र बोधगया के नाम से प्रसिद्द हुआ।
ज्ञान-प्राप्ति के बाद उपदेश देने के उद्धेश्य से एक दिन बुद्ध सुजाता के गांव सेनानी में थे। प्रवचन के बाद खीर के लिए आभार प्रकट करने जब वे सुजाता के घर गए तो घर के भीतर से लड़ाई-झगडे का शोर उठ रहा था। बुद्ध के आगमन की सूचना पाकर सुजाता के श्वसुर अनाथपिण्डिका बाहर आए। उन्होंने बुद्ध से क्षमा-याचना करते हुए उन्हें बताया कि उनकी बहू सुजाता घर में सास-ससुर-पति किसी की भी नहीं सुनती। उसमें बड़े कुल की बेटी होने का अभिमान है और वह ससुराल के लोगों के साथ अपमानजनक व्यवहार करती है। बुद्ध ने सुजाता को बुलाकर उसे समझाया - 'स्त्रियां सात प्रकार की होती हैं। उनमें से पहली तीन - वधक, चोर व आर्या स्वभाव से निर्दया, झगड़ालू और अप्रियभाषिणी होती हैं। शेष चार प्रकार की स्त्रियां हैं - माता, भगनी, सखी व दासी। ये चारों प्रकार की स्त्रियां आमतौर पर शीलवती, सदाचारी और मृदुभाषी होती हैं। अपने अच्छे आचरण से स्वयं भी सुखी रहती हैं और अपने स्वजनों-परिजनों को भी सुखी रखती हैं। सुजाता, तुम बताओ कि तुम इनमें से किस प्रकार की स्त्री हो ?' बुद्ध की बातें सुनकर सुजाता को अपनी भूल का बोध हुआ। उसने परिवार में सबसे क्षमा मांगते हुए बुद्ध को आश्वासन दिया कि वह अपने स्वभाव में परिवर्तन लाएगी और भविष्य में सभी का सम्मान करेगी। बुद्ध ने उसे सफल गृहस्थ जीवन के कई सूत्र दिए और विदा ली।
इस घटना के बाद भी बुद्ध और सुजाता की भेट के दो संदर्भ मिलते हैं। अपने जीवन के उत्तरार्द्ध में सुजाता साकेत के एक मठ में बुद्ध का प्रवचन सुनने गई थी। बुद्ध के प्रभामंडल से वह इतना प्रभावित हुई कि वह बुद्ध से धर्म की दीक्षा लेकर बौद्ध भिक्षुणी बन गई। दीक्षा लेने के बाद वर्षों तक वह साकेत में तपस्विनी का जीवन जीती रही थी। बौद्ध ग्रंथों में एक बार और उसका उल्लेख आया है जब वह वैशाली के पास स्थित एक आश्रम मे बुद्ध से अंतिम बार मिली थी। इसी आश्रम में बुद्ध की उपस्थिति में उसने अंतिम सांस ली। सुजाता का उल्लेख बौद्ध ग्रन्थ 'थेरीगाथा' में भी है। 'थेरीगाथा' बौद्ध-भिक्षुणियों की उन कविताओं का संकलन है जिनमें उन्होंने सांसारिकता की व्यर्थता को रेखांकित करते हुए निर्वाण की दिशा में अपनी यात्रा के अनुभवों को भविष्य की भिक्षुणियों के मार्गदर्शन के लिए साझा किया है। दूसरी कई बौद्ध भिक्षुणियों के साथ 'थेरीगाथा' में सुजाता की भी एक कविता संकलित है। सुजाता की उस एकमात्र उपलब्ध कविता का मेरे द्वारा अंग्रेजी से किया गया भावानुवाद आप भी देखें !
खूबसूरत, झीने, अनमोल परदों में
चंदन-सी सुगंधित
बहुमूल्य आभूषणों और
पुष्प मालाओं से सजी
घिरी हुई दास-दासियों
दुर्लभ खाद्य और पेय से
मैंने जीवन के सभी सुख
सभी ऐश्वर्य, सभी क्रीडाएं देखी
लेकिन जिस दिन मैंने
बुद्ध का अद्भुत प्रकाश देखा
झुक गई उनके चरणों में
और देखते-देखते
मेरा जीवन परिवर्तित हो गया
उनके शब्दों से मैंने जाना
कि क्या होता है धम्म
कैसा होता है वासनारहित होना
इच्छाओं से परे हो जाने में
क्या और कैसा सुख है
और अमरत्व क्या होता है
बस उसी दिन मैंने पा लिया
एक ऐसा जीवन
जो जीवन के दुखों से परे है
और एक ऐसा घर
जिसमें घर होता ही नहीं

 

Courtesy: Dhruv Gupt

The Exemplary Educational Reward

Dr. Rumki Gupta, Eminent Scientist, Psychology Research Unit, Indian Statistical Institute, Kolkata, India has achieved the mindboggling academic cognizance in International Conference on Interdisciplinary Research and Technological Developments, which has taken place on 28th October, 2017 at Hotel Shambala in Kathmandu, Nepal.

Read more ...
 

DEMONETISATION 2016

On November  8th 2016  our Honourable Prime Minister Narendra Damodardas MODI    urf MODIji made a great announcement of “ Chalanbandi “, “ Vimudrikaran “   “ DEMONETISATION  ”.  And from Nov. 9th to Dec 30th he put a BAN on all 500 and 1000 notes.PM Modiji announced on Nov 8th that the high value currency

Read more ...
 

हमसे नज़रिया काहे फेरी हो बालम !

पिछली रात दिल का दौरा पड़ने से देश की महानतम शास्त्रीय गायिकाओं में एक 88-वर्षीय गिरिजा देवी का पिछली रात निधन भारतीय संगीत प्रेमियों के लिए सदमें जैसा है।कल तक वे अपनी पीढ़ी की अंतिम जीवित गायिका थीं। बनारस घराने की इस विलक्षण गायिका को ठुमरी और दादरा जैसी उपशास्त्रीय और लोक गायन की शैलियों को लोकप्रियता का शिखर देने का श्रेय जाता है।

Read more ...
 
Go to top