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भारत की सबसे बडी केडरबेस पार्टी CPI (M) की त्रिपुरा विधानसभा मै २५ सालोंकी सत्ता *भारत जलाओ पार्टी* ने कॉंग्रेस के वोट बॅंक पैसे और ताकद के बल पर और EVM घोटालेसे जितकर ध्वस्त की | CPM के त्रिपुरा वोट शेअर २०१३ के ४८% से मात्र ३% घटकर ४५% हुए है मगर कॉंग्रेस के वोट शेअर ३६% से मात्र १% ही रह गए - मतलब साफ है.

पिछले २-३ सालोंसे यहॉ के बिकाउ कॉंग्रेस नेता और कार्यकर्ताओंको खरीदकर मैदान साफ कर लिया था. संघका मुंबई कार्यकर्ता सुनिल देवधर त्रिपुरा के ३०% आदीवासियों मै २ सालसे वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यमसे धर्म का जहर फैला रहा था तब CPM केडर क्या कर रहे थे ?

२५ सालोंतक त्रिपुरा मै, ३० साल पश्चिम बंगाल मै और हर ५ साल बाद सत्ता मै आते हुए केरल जैसे राज्योंमै कम्युनिझम की कौनसी नीव इस पार्टीने रखी ? कौनसा रोल मॉडेल इन्होने देशके सामने रखा ? इनकी बुनियादी विचारधाराको दिल्ली मै दोहराते हुए *आप* ने लोगोंकी शिक्षा, स्कूल, स्वास्थ्य, बिजली जैसी सुविधाओंपर जोर देकर ७० मैसे ६७ सीटे जीती फिरभी ये अबतक CPI के साथ एक पार्टी नही हो पाए है तो फिर बाकी वामपंथी दल उसके बाद प्रादेशिक पार्टीया फिर कॉंग्रेस फिर *भारत जलाओ पार्टी* यह बडा राजनैतिक दांव खेलने मै CPM कैसे सफल होगी ?

*क्या इन राज्योंमै KG से PG शिक्षा सुविधाए सरकारी और मुफ्त मिल रही है ?*

*क्या इन राज्योंमै सभी स्वास्थ्य सुविधाए, मेडिकल शिक्षा सरकारी और मुफ्त है ?*

*क्या इनके राज्योंमै बिजली, पाणी, मकान सस्ते है ?*

*क्या इनके राज्योंमै बेरोजगारी, जातीयवाद, धर्मवाद कम या खत्म हो रहा है ?*

*क्या इस पार्टीने या पॉलीटब्युरोने संघ परिवार द्वारा देशभर मै किए गए असंख्य बम धमाकोंके खिलाफ आवाज उठाई या फिर कॉ. हेमंत करकरे की निर्मम हत्या के खिलाफ आवाज उठाई ? क्या दयानंद पांडे और कर्नल पुरोहित के लॅपटॉप की जांच की मांग इन्होने की ?

*क्या इनके पॉलीटब्युरो मै सभी समाज समूहोंका प्रतिनिधित्व है?*

*क्या इन राज्योंमै भूमिहीन, दलितोको और गरिब किसानोंको जमीने बाटी गयी है ?* (बहूत कम)

सच्चाई ये जरुर है की *नौकरशाह* (Bureaucrats) असल मै देश और राज्य का कारोबार चलाते है मगर क्या इन लेफ्ट राज्योंमै *कॅबिनेट का अंकुश उन देशद्रोही भ्रष्ट नौकरशाहोंपर है ?*

इन सबका नकारार्थी उत्तर का मतलब है इन पार्टीके *नेतृत्व ने कम्युनिझम के विचारोंसे गद्दारी की है* क्युकी *नेतृत्व का अपयश विचारधारा का अपयश कैसे हो सकता है ?*

*भारत जलाओ पार्टी* को हराना है तो सिर्फ राजनैतिक फ्रंट पर लडाई काफी नही है. जाती धर्म के नाम पर जो जहर ये देशमै फैला रही है इससे लडने के लिए राजा शिवाजी से लेकर महात्मा फुले, छत्रपती शाहू और डॉ. आंबेडकर इन सभीने जातीव्यवस्था समाप्त करनेका *आंतरजाती विवाह* ये जो जालीम उपाय बताया था उसपर इन पार्टीके उच्च जातीय नेतृत्व ने क्या किया ? इन्होने तो यह विषय अजेंडे पर लेनेसेही इन्कार किया था जिससे व्यथित होकर महाराष्ट्र के महान नेता कॉ. शरद पाटील ने *सत्यशोधक कम्युनिष्ट पार्टी* बनाई जो इस विषय को लेकर आगे बढी.

अभीभी देर नही हुई है. केरल मै यह सब करके देश के सामने रोल मॉडेल रखा जा सकता है पर इसके लिए क्या अपनी गलतियां कबूल करेगी पॉलीटब्युरो ? *ज्योती बसूको प्रधानमंत्री न बनने देनेका Historic Blunder सबसे बडी गलती रही ये कबूल करेंगे ?* कुछ दिन पहलेही पॉलिटब्युरोने सिताराम येचुरीका कॉंग्रेस से गठबंधनका प्रस्ताव प्रकाश करात गुटने पास नही होने दिया. ये एक तरहसे भाजपाको मदद करने जैसा ही है.

कल खबर आयी है की युपी मै समाजवादी पार्टीसे मायावती ने गठबंधन करनेका फैसला किया है. देरसे आए लेकिन दुरुस्त आए. महाराष्ट्र मै सभी लेफ्ट पार्टीया ॲड. प्रकाश आंबेडकर के साथ है. अगर इसमै अलग अलग दुकाने खोले हुए गुट शामील हो जाए और भाजपा मै शामील गद्दारोंको सबक सिखाए तो कॉंग्रेस को साथ लेकर परिस्थिती बदल सकती है !

अनेक राज्योंमै प्रादेशिक पार्टीया *भारत जलाओ पार्टी* के खिलाफ है उनको और कॉंग्रेस को साथ लेकर अगर महागठबंधन का एकही उम्मीदवार दिया जाए और क्रॉस वोटिंग हो तो *भारत जलाओ पार्टी* को आसानी से हराया जा सकता है !

*सवाल ये नही है की लेफ्टको अब भारत मै भविष्य है या नही, असली सवाल तो ये है की लेफ्ट विचारधारा के बगैर क्या देशको भवितव्य है*

*The question is not whether Left has any future in India but the real question is does India has good future without Left Ideology*

PRESS RELEASE OF AETM 2018

Research education is having an ageless impression for its most dynamic future and it is exclusively notable for the researchers to find the indelible discovery. 4th International Conference on Advancements in Engineering, Technology and Management has taken place at “The Ten, Eastin Hotel, Makassan, Bangkok, Thailand,

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चुनावी माहौल में उलझते बुनियादी सवाल

2019 के चुनावों की पेशबंदी शुरू हो गयी है। जहां एक तरफ भाजपा भविष्य के खतरे को देखते हुए रूठे साथियों को मनाने में जुटी है, वहीं विपक्षी दल आपसी तालमेल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। दोनों ही पक्षों की तरफ से सोशल मीडिया पर मनोवैज्ञानिक युद्ध जारी है। जहां भाजपा का सोशल मीडिया देशवासियों को मुसलमानों का डर दिखाने में जुटा है, वहीं  विपक्षी मीडिया, जो अभी कम आक्रामक

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मोदी जी की साफ नीयत: सही विकास

राजनेताओं द्वारा जनता को नारे देकर, लुभाने का काम लंबे समय से चल रहा है। ‘जय जवान-जय किसान’, ‘गरीबी हटाओ’, ‘लोकतंत्र बचाओ’, ‘पार्टी विद् अ डिफरेंस’ व पिछले चुनाव में भाजपा का नारा था, ‘मोदी लाओ-देश बचाओ’। जब से मोदी जी सत्ता में आऐ हैं, भारत को परिवर्तन की ओर ले जाने के लिए उन्होंने बहुत सारे नये नारे दिये, जिनमें से एक है, ‘साफ नीयत-सही विकास’।

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