Menu

User Rating: 0 / 5

Star InactiveStar InactiveStar InactiveStar InactiveStar Inactive
 

उ.प्र. के चुनाव परिणामों ने मोदी के राष्ट्रवाद पर मोहर लगा दी है। जो इस उम्मीद में थे कि नोटबंदी मोदी को ले डूबेगी, उन्हें अब बगले झांकनी पड़ रही है। हमने नोटबंदी के उन्माद के दौर में भी लिखा था कि तुर्की के राष्ट्रपति मुस्तफा कमाल पाशा की तरह मोदी सब विरोधों को झेलते हुए अपना लक्ष्य हासिल कर लेंगे। उनके सेनापति अमित शाह ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रांत जीतकर मोदी की

ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है। दरअसल उ.प्र. की जनता को मोदी का प्रखर राष्ट्रवाद अपील कर गया। अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण की राजनीति ने देश का सही विकास नहीं होने दिया। इससे न हिंदुओं का लाभ हुआ और न मुसलमानों को।

मगर यह भी सही है कि भाजपा ने उप्र को जीतकर अपनी जिम्मेदारियां और बढ़ा ली हैं। क्षेत्रीय दलों को केंद्र में रखकर देखें तो यह चैंकाने वाली बात है कि उप्र में दोनों प्रमुख दल यानी सपा और बसपा लगभग हाशिए पर चले गए हैं। यह बात देश की राजनीति में क्षेत्रीय राजनीति के अवसान का संकेत दे रही है।

यह सर्वस्वीकार्य बात है कि भाजपा का उप्र में अपना वजूद कोई बहुत ज्यादा नहीं था। भाजपा के लिए मोदी और अमित शाह की अपनी हैसियत ने ही सारा काम किया। इसलिए यह जीत भी उन्ही की ही साबित होती है। इसलिए चाय बेचने से लेकर प्रधानमंत्री के पद तक पहुचने का मोदी का सफर चंद्रगुपता मौर्य की तरह संघर्षों से भरा रहा है। इसलिए यह विश्वास होता  है कि मोदी भी मौर्य शासक की तरह भारत  को सुदृढ़ बनाने का काम करेंगे।

अगर ऐसा है तो उप्र की जनता की उम्मीदें भाजपा से नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ही होंगी। और इसमें भी कोई शक नहीं कि प्रधानमंत्री होने के कारण उनकी हैसियत भी बहुत कुछ करने की है।

यहां याद दिलाने की बात यह है कि उप्र में प्रचार के दौरान मोदी ने उप्र के विकास में बाधाओं की बात कही थी। उन बाधाओं में एक थी कि केंद्र की भेजी मदद को उप्र खर्च नहीं कर पाया। यानी उप्र में सरकारी खर्च बढ़ाया जाना पहला काम होगा जो सरकार बनते ही दिखना चाहिए। किसानों की कर्ज माफी दूसरा बड़ा काम है। लेकिन इसके लिए उप्र सरकार कितना क्या कर पाएगी यह अभी देखना होगा लेकिन पूरे देश के लिहाज से भी यह काम असंभव नहीं है। हो सकता है कि उप्र के बहाने पूरे देश को किसानों को यह राहत मिल जाए।

उप्र में प्रचार के दौरान अखिलेश सरकार ने अपने विकास कार्यों को मुख्य मुददा बनाने की कोशिश जरूर की थी लेकिन चुनाव नतीजे बता रहे हैं कि यह मुददा बन नहीं पाया। बल्कि भाजपा ने प्रदेश में सड़कें, पुल, सिंचाई, नए कारखाने, रोजगार की कमी बताते हुए अखिलेश सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश्श की थी। सो अब बिल्कुल तय है कि इन मोर्चों पर नई सरकार को कुछ करते हुए दिखना पड़ेगा। लेकिन इन कामों को पहले से ज्यादा बड़े पैमाने पर होते हुए दिखाना आसान काम नहीं है। इसीलिए नई सरकार को इस मामले में सतर्क रहना पड़ेगा कि पहले से जो हो रहा था उसकी अनदेखी न हो जाए।

लगे हाथ इस बात की चर्चा कर लेनी चाहिए कि क्या उप्र का चुनाव वाकई 2019 में लोकसभा चुनाव के पहले एक सेमीफायनल था। इसमें कोई शक नहीं कि प्रधानमंत्री को ही आगे रखकर चुनाव लड़ा गया। लेकिन इतने भर से उप्र का चुनाव सेमीफायनल जैसा नहीं बन जाता। खासतौर पर इसलिए क्योंकि 2019 के पहले कुछ और बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उन चुनावों के दौरान भी भाजपा को प्रधानमंत्री का चेहरा दाव पर लगाना पड़ेगा। हालांकि उन ज्यादातर प्रदेशों में भाजपा की ही सरकार है। सो यह तय है कि उप्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद शुरू हुए नए कामों का जिक्र किया जाएगा। इस लिहाज से भाजपा को उप्र में अपना ही विकास मंच सजाने की जरूरत पड़ेगी। तभी वह 2019 के पहले होने वाले विधान सभा चुनावों में सिर उठा कर प्रचार कर पाएगी। इस तरह  साबित होता है कि सेमीफाइनल उप्र नहीं था बल्कि अभी होना है।

उप्र में भाजपा को जीत ऐसे मुश्किल समय में मिली है जब केंद्र में मोदी सरकार के तीन साल गुजर चुके हैं। इसमें कोई शक नहीं कि सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अपनी उपलब्धियों को भौतिक रूप से कैसे दिखाए। अब तक जिन प्रदेशों में उसकी सरकार बनी है वे सारे बीमारू राज्य के रूप में प्रचारित किए जाते थे। अपनी सत्ता आने के पहले यह प्रचार खुद भाजपा ही करती आ रही थी। सो स्वाभाविक था उन राज्यों की हालत सुधार देने का दावा उसे लगातार करना ही पड़ा। लेकिन वे छोटे राज्य थे। अब जिम्मेदारी उप्र जैसे भारीभरकम राज्य में कर दिखाने की आई है।

The Exemplary Educational Reward

Dr. Rumki Gupta, Eminent Scientist, Psychology Research Unit, Indian Statistical Institute, Kolkata, India has achieved the mindboggling academic cognizance in International Conference on Interdisciplinary Research and Technological Developments, which has taken place on 28th October, 2017 at Hotel Shambala in Kathmandu, Nepal.

Read more ...
 

DEMONETISATION 2016

On November  8th 2016  our Honourable Prime Minister Narendra Damodardas MODI    urf MODIji made a great announcement of “ Chalanbandi “, “ Vimudrikaran “   “ DEMONETISATION  ”.  And from Nov. 9th to Dec 30th he put a BAN on all 500 and 1000 notes.PM Modiji announced on Nov 8th that the high value currency

Read more ...
 

हमसे नज़रिया काहे फेरी हो बालम !

पिछली रात दिल का दौरा पड़ने से देश की महानतम शास्त्रीय गायिकाओं में एक 88-वर्षीय गिरिजा देवी का पिछली रात निधन भारतीय संगीत प्रेमियों के लिए सदमें जैसा है।कल तक वे अपनी पीढ़ी की अंतिम जीवित गायिका थीं। बनारस घराने की इस विलक्षण गायिका को ठुमरी और दादरा जैसी उपशास्त्रीय और लोक गायन की शैलियों को लोकप्रियता का शिखर देने का श्रेय जाता है।

Read more ...
 
Go to top