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उत्तराखंड में गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए बरसो से आन्दोलनरत हरिद्वार के आध्यात्मिक केंद्र 'मातृ सदन' के परमाध्यक्ष गुरुदेव स्वामी शिवानंद अपने शिष्यों के साथ प्रदेश सरकार तथा ठेकेदारों की मिलीभगत से गंगा और उसकी सहायक नदियों के खनन और दोहन के विरुद्ध पिछले कई दिनों से अन्न, जल और वाणी का त्याग कर अनशन पर बैठे थे।

उनसे वार्ता कर समस्या के समाधान के रास्ते खोजने के बजाय हरिद्वार के प्रशासन ने पिछली रात भारी पुलिस बल के साथ आश्रम पर हमला कर जो हंगामा खड़ा किया, वह बेहद शर्मनाक था। उन्होंने न सिर्फ आश्रम में तोड़फोड़ की, सन्यासियों को डराया और धमकाया, बल्कि बिजली के कटर से गुरुदेव के छोटे-से तपस्या कक्ष की ग्रिल तोड़ने के प्रयास में कमरे को धुएं से भर दिया जिसकी वज़ह से उनका दम घुटने लगा। प्रशासन उन्हें अबतक गिरफ्तार तो नहीं कर सका है, लेकिन भारी पुलिस बल ने आश्रम को घेरा हुआ है। उत्तराखंड सरकार के इस अमानवीय कृत्य की हर तरफ निंदा हो रही है। हैरानी यह है कि गंगा की कमाई खाने वाले बाबा रामदेव सहित हरिद्वार के सभी सरकारी संत, पीठ और आश्रम सरकार की इस ज्यादती पर चुप्पी साधे हुए हैं ! पिछली कांग्रेस की सरकार ने भी गंगा के लिए अपना आंदोलन वापस लेने के लिए 'मातृ सदन' पर कई तरह से दबाव बनाया था और धमकियां भी दी थी, लेकिन इतनी वीभत्सता तो वह भी नहीं कर पाई थी। भारतीय संस्कृति की झूठी झंडाबरदार और 'नमामि गंगे' के नाम पर जनता को ठगने वाली भाजपा सरकार के फासीवादी चरित्र पर क्या अब भी किसी को कोई शंका रह गई है ?

 

Courtesy: Dhruv Gupt

नानक शाह फकीर फिल्म पर विवाद क्यों?

सिक्ख धर्म संस्थापक परमादरणीय गुरू नानक देव जी के जीवन व शिक्षाओं पर आधारित फिल्म ‘नानक शाह फकीर’ काफी विवादों में है। सुना है कि शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी और कुछ सिक्ख नेता इसे रिलीज नहीं होने देना चाहते। उनका कहना है कि गुरू नानक जी पर फिल्म नहीं बनाई जा सकती । क्योंकि उनका किरदार कोई मनुष्य नहीं निभा सकता।

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राजनीति से असली मुद्दे नदारद

देश में हर जगह कुछ लोग आपको ये कहते जरूर मिलेंगे कि वे मोदी सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि मजदूर किसान की हालत नहीं सुधरी, बेरोजगारी कम नहीं हुई, दुकानदार या मझले उद्योगपति अपने कारोबार बैठ जाने से त्रस्त हैं, इन सबको लगता है कि 4 वर्ष के बाद भी उन्हें कुछ मिला नहीं बल्कि जो उनके पास था, वो भी छिन गया। जाहिर है

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Ishika Mukherjee: new sensation

In this dreamy ideology a number of enriched vocalists have produced their remarkable stature of voice in engaging our national legacy already. Respected “Ishika Mukherjee” is one of them. She is the real iconic personality our “City of Joy”, Kolkata has ever produced not only to enlist her leading articulations but to pay her

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