User Rating: 0 / 5

Star InactiveStar InactiveStar InactiveStar InactiveStar Inactive
 

उत्तराखंड में गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए बरसो से आन्दोलनरत हरिद्वार के आध्यात्मिक केंद्र 'मातृ सदन' के परमाध्यक्ष गुरुदेव स्वामी शिवानंद अपने शिष्यों के साथ प्रदेश सरकार तथा ठेकेदारों की मिलीभगत से गंगा और उसकी सहायक नदियों के खनन और दोहन के विरुद्ध पिछले कई दिनों से अन्न, जल और वाणी का त्याग कर अनशन पर बैठे थे।

उनसे वार्ता कर समस्या के समाधान के रास्ते खोजने के बजाय हरिद्वार के प्रशासन ने पिछली रात भारी पुलिस बल के साथ आश्रम पर हमला कर जो हंगामा खड़ा किया, वह बेहद शर्मनाक था। उन्होंने न सिर्फ आश्रम में तोड़फोड़ की, सन्यासियों को डराया और धमकाया, बल्कि बिजली के कटर से गुरुदेव के छोटे-से तपस्या कक्ष की ग्रिल तोड़ने के प्रयास में कमरे को धुएं से भर दिया जिसकी वज़ह से उनका दम घुटने लगा। प्रशासन उन्हें अबतक गिरफ्तार तो नहीं कर सका है, लेकिन भारी पुलिस बल ने आश्रम को घेरा हुआ है। उत्तराखंड सरकार के इस अमानवीय कृत्य की हर तरफ निंदा हो रही है। हैरानी यह है कि गंगा की कमाई खाने वाले बाबा रामदेव सहित हरिद्वार के सभी सरकारी संत, पीठ और आश्रम सरकार की इस ज्यादती पर चुप्पी साधे हुए हैं ! पिछली कांग्रेस की सरकार ने भी गंगा के लिए अपना आंदोलन वापस लेने के लिए 'मातृ सदन' पर कई तरह से दबाव बनाया था और धमकियां भी दी थी, लेकिन इतनी वीभत्सता तो वह भी नहीं कर पाई थी। भारतीय संस्कृति की झूठी झंडाबरदार और 'नमामि गंगे' के नाम पर जनता को ठगने वाली भाजपा सरकार के फासीवादी चरित्र पर क्या अब भी किसी को कोई शंका रह गई है ?

 

Courtesy: Dhruv Gupt