Menu

User Rating: 0 / 5

Star InactiveStar InactiveStar InactiveStar InactiveStar Inactive
 

भारत जैसे गणतंत्र में कुछ संवेदनशील अवसरों को छोड़कर राष्ट्रपति का पद आम तौर पर शोभा का पद होता है। देश की गरिमा के लिए इस पद को राजनीति से मुक्त किया जाना चाहिए था। सौभाग्य से इस पद की शोभा कभी-कभी डॉ राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक, डॉ ज़ाकिर हुसैन जैसे शिक्षाविद और डॉ कलाम जैसे वैज्ञानिक बढ़ाते रहे हैं।

कांग्रेस के इंदिरा युग से राष्ट्रीय गरिमा के इस पद पर सत्ताधारी दलों के चमचो-बेलचों की नियुक्ति की जो परंपरा क़ायम हुई, वह कमोबेश आज भी ज़ारी है। इसी चमचा परंपरा की देन ज्ञानी जैल सिंह और प्रतिभा पाटिल जैसे कुछ राष्ट्रपति रहे हैं। देश के सर्वोच्च पद का अवमूल्यन करने की जो शुरूआत कांग्रेसियों ने की, उसपर डॉ कलाम जैसे सम्मानित वैज्ञानिक को बिठाकर अटल बिहारी वाजपेयी ने लगाम लगाने की मज़बूत कोशिश की थी। अभी मोदी जी के समय में कांग्रेस की उसी परंपरा की वापसी हुई है। भाजपा ने अपने दूसरे दर्जे के जिस नेता राम नाथ कोविद को राष्ट्रपति पद के लिए अपना प्रत्याशी घोषित किया है, उनकी सबसे बड़ी योग्यता यह है कि वे दलित समुदाय से आते हैं। कभी जातीय संगठन अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष रहे और फिर भाजपा की कृपा से राज्यसभा पहुंच गए। अमित शाह की कृपा से वे फिलहाल बिहार के राज्यपाल पद पर बने हुए हैं। सरकार आश्वस्त है कि दलित के नाम पर जातिवादी विपक्ष भी उनका विरोध करने के पहले कई बार सोचेगा। जो लोग दलित बिरादरी से आने की वज़ह से उनकी वकालत कर रहे हैं, क्या वे बताएंगे कि अपने पूरे जीवन में उन्होंने दलितों के हित में कौन सा संघर्ष किया है ? या कम से कम राज्यसभा में ही दलितों के पक्ष में कब-कब आवाज़ उठाई है ? परदे के पीछे का सच यह है कि अगले चुनाव के पहले भाजपा सरकार अपने छिपे एजेंडे को लागू करने के लिए संविधान में कई बड़े बदलाव करने जा रही है और इन बदलावों की राह आसान करने के लिए उसे राष्ट्रपति पद पर उसके एहसानों से लदे एक रीढ़विहीन व्यक्ति की आवश्यकता है।


देश के विपक्ष से फिलहाल कोई उम्मीद तो नहीं,लेकिन वह चाहे तो राजनीति से इतर कला शिक्षा, विज्ञान, समाज सेवा, साहित्य या संगीत के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने वाले किसी सर्वमान्य नाम को आगे बढ़ाकर देश को एक अच्छा संदेश तो दे ही सकता है !

 

 

Courtesy: Dhruv Gupt

पत्थर से दिल लगाया और दिल पे चोट खाई !

यह संवेदनहीनता की इन्तेहा ही थी।बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में छेड़खानी की लगातार बढती घटनाओं और इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन की मूढ़ता और उदासीनता से परेशान विश्वविद्यालय की सैकड़ों लडकियां अपनी फ़रियाद सुनाने के लिए विश्वविद्यालय के गेट पर खड़ी दो दिनों के बनारस दौरे पर गए अपने सांसद और देश के प्रधानमंत्री मोदी की बाट जोहती रही।

Read more ...
 

MICHAEL JACKSON A PRODIGY

Michael Jackson was always a mystery to his fans and critics.  MJ had an enigmatic personality; his death was a shrouded mystery.  He gave us a music which has no parallel Chandra till the date he was practicing music till 48 hours before he die. The last decade of his life became murky for all the hearsay and rumors.

Read more ...
 

गौरी लंकेश के बहाने

 

दुनिया की कोई भी विचारधारा या कोई भी धर्म एक इंसानी जान से ज्यादा कीमती नहीं हो सकते,लेकिन दुर्भाग्य से दुनिया में सबसे ज्यादा इंसानी हत्याएं धर्म या विचारधारा के नाम पर ही हुई है। आधुनिक विश्व में विचारधारा के नाम पर क़त्लेआम का सबसे वीभत्स रूप वामपंथ ने दिखाया है।

Read more ...
 
Go to top