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भारत जैसे गणतंत्र में कुछ संवेदनशील अवसरों को छोड़कर राष्ट्रपति का पद आम तौर पर शोभा का पद होता है। देश की गरिमा के लिए इस पद को राजनीति से मुक्त किया जाना चाहिए था। सौभाग्य से इस पद की शोभा कभी-कभी डॉ राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक, डॉ ज़ाकिर हुसैन जैसे शिक्षाविद और डॉ कलाम जैसे वैज्ञानिक बढ़ाते रहे हैं।

कांग्रेस के इंदिरा युग से राष्ट्रीय गरिमा के इस पद पर सत्ताधारी दलों के चमचो-बेलचों की नियुक्ति की जो परंपरा क़ायम हुई, वह कमोबेश आज भी ज़ारी है। इसी चमचा परंपरा की देन ज्ञानी जैल सिंह और प्रतिभा पाटिल जैसे कुछ राष्ट्रपति रहे हैं। देश के सर्वोच्च पद का अवमूल्यन करने की जो शुरूआत कांग्रेसियों ने की, उसपर डॉ कलाम जैसे सम्मानित वैज्ञानिक को बिठाकर अटल बिहारी वाजपेयी ने लगाम लगाने की मज़बूत कोशिश की थी। अभी मोदी जी के समय में कांग्रेस की उसी परंपरा की वापसी हुई है। भाजपा ने अपने दूसरे दर्जे के जिस नेता राम नाथ कोविद को राष्ट्रपति पद के लिए अपना प्रत्याशी घोषित किया है, उनकी सबसे बड़ी योग्यता यह है कि वे दलित समुदाय से आते हैं। कभी जातीय संगठन अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष रहे और फिर भाजपा की कृपा से राज्यसभा पहुंच गए। अमित शाह की कृपा से वे फिलहाल बिहार के राज्यपाल पद पर बने हुए हैं। सरकार आश्वस्त है कि दलित के नाम पर जातिवादी विपक्ष भी उनका विरोध करने के पहले कई बार सोचेगा। जो लोग दलित बिरादरी से आने की वज़ह से उनकी वकालत कर रहे हैं, क्या वे बताएंगे कि अपने पूरे जीवन में उन्होंने दलितों के हित में कौन सा संघर्ष किया है ? या कम से कम राज्यसभा में ही दलितों के पक्ष में कब-कब आवाज़ उठाई है ? परदे के पीछे का सच यह है कि अगले चुनाव के पहले भाजपा सरकार अपने छिपे एजेंडे को लागू करने के लिए संविधान में कई बड़े बदलाव करने जा रही है और इन बदलावों की राह आसान करने के लिए उसे राष्ट्रपति पद पर उसके एहसानों से लदे एक रीढ़विहीन व्यक्ति की आवश्यकता है।


देश के विपक्ष से फिलहाल कोई उम्मीद तो नहीं,लेकिन वह चाहे तो राजनीति से इतर कला शिक्षा, विज्ञान, समाज सेवा, साहित्य या संगीत के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने वाले किसी सर्वमान्य नाम को आगे बढ़ाकर देश को एक अच्छा संदेश तो दे ही सकता है !

 

 

Courtesy: Dhruv Gupt

नीरव मोदी, गुप्ता बंधु और नरेश गोयल में क्या समान है ?

पंजाब नेशनल बैंक ही नहीं, अभी और भी कई बैंक इसकी चपेट में आने वाले हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते के 3 बड़े घोटालों के बीच एक व्यक्ति का नाम हर जगह उभर कर आ रहा है और वो है जैट ऐयरवेज़ के मालिक नरेश गोयल का। जैट ऐयरवेज़ की हवाई उड़ानों पर नीरव मोदी के विज्ञापन अभी तक प्रसारित हो रहे हैं। इन दोनों कंपनियों के बीच आर्थिक लेनदेन का जो कारोबार चल रहा है,

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श्रीमती चौधरी की हंसी !

इस देश की सरकार और प्रधानमंत्री की नीतियों से हमारी असहमति अपनी जगह पर सही है, लेकिन कल लोकतंत्र के मंदिर संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री के वक्तव्य के दौरान कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी का बेहूदा अट्टहास बेहद शर्मनाक था। उससे ज्यादा शर्मनाक था देश के प्रधानमंत्री का उनकी हंसी की तुलना रामायण सीरियल के किसी राक्षस से करना.!

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i-Proclaim Annual Research Award, 2017

It is indeed an astounding pleasure to convey that i-Proclaim 3rd Annual Research Conference (About Business, Humanity and Law) has already been organized on 31st December, 2017 at Mini Auditorium, IIUM in Kuala Lumpur, Malaysia. This prestigious international event has provided the scholarly academic platform

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