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सोशल मीडिया पर मूर्खताओं की नई खेप आई हुई है। लोग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के इस आदेश का मज़ाक उड़ा रहे हैं कि उन्होंने प्रदेश के सभी रैंक के अफसरों को यह आदेश दिया है कि उन्हें प्रदेश के विधायकों का खड़े होकर स्वागत करना है, खड़े होकर उन्हें विदा करना है और व्यवहार तथा बातचीत में उनकी प्रतिष्ठा का ख्याल रखना है।

बहुत से लोगों को यह आदेश अफसरों को विधायकों का चपरासी या अधीनस्थ बना देने की सरकार की साज़िश लग रही है। उन्हें पता नहीं कि यह एक ऐसा प्रोटोकोल है जो देश के हर राज्य में लागू है और लागू होना भी चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायक और सांसद जनता के प्रतिनिधि होते हैं और अफसर जनता के सेवक। अफसर कितना भी बड़ा हो,उसका क़द जनता से ऊपर नहीं हो सकता। जनता ने अगर किसी अनपढ़, मूर्ख या अपराधी को ही अपना विधायक या सांसद चुना है तो यह जनता का मसला है। जनता के किसी सेवक को जनता के विवेक को चुनौती देने का अधिकार नहीं है। जब भी कोई विधायक या सांसद उसके पास जाए, अफसर को खड़े होकर उसका अभिवादन करना है और खड़े होकर सम्मान के साथ ही उसे विदा करना है। जनप्रतिनिधियों के पास उसके क्षेत्र के लोग अपनी शिकायतें लेकर जाएंगे ही। जनप्रतिनिधि का यह कर्तव्य भी है और अधिकार भी कि वह संबंधित अधिकारियों के आगे लोगों की शिकायतें रखें। अफसरों के लिए बाध्यकारी है कि वे जनप्रतिनिधियों को सम्मान के साथ सुनें। समस्या अगर सही है तो उनका निराकरण करे और अगर गलत है तो उनके आगे विनम्रता से अपना पक्ष रखे। यह मानकर चलना सही नहीं है कि जनप्रतिनिधि हमेशा गलत ही होते हैं। आम जनता से सीधा संवाद न होने के कारण अक्सर अफसरों के पास उनके अधीनस्थों के माध्यम से एकांगी और पूर्वग्रहग्रस्त सूचनाएं ही पहुंचती हैं। जनता का प्रतिनिधि जनता के बीच से आता है। संभव है कि उसके पास कुछ ऐसी जानकारियां हों जो उस तक नहीं पहुंची या पहुंचने ही नहीं दी गईं। उनकी बात सुनकर उनकी छानबीन कर लेने में कोई हर्ज़ नहीं ! कई बार इनसे सत्य भी उद्घाटित हो सकता है।
दोस्तों, विरोध करने के पहले किसी तथ्य की जानकारी भी प्राप्त कर लें ! विरोध के ज़ुनून में कृपया देश की लोकतांत्रिक मर्यादाओं की जड़ों पर चोट करने से बचें !

Courtesy: Dhruv Gupt

PRESS RELEASE OF AETM 2018

Research education is having an ageless impression for its most dynamic future and it is exclusively notable for the researchers to find the indelible discovery. 4th International Conference on Advancements in Engineering, Technology and Management has taken place at “The Ten, Eastin Hotel, Makassan, Bangkok, Thailand,

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चुनावी माहौल में उलझते बुनियादी सवाल

2019 के चुनावों की पेशबंदी शुरू हो गयी है। जहां एक तरफ भाजपा भविष्य के खतरे को देखते हुए रूठे साथियों को मनाने में जुटी है, वहीं विपक्षी दल आपसी तालमेल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। दोनों ही पक्षों की तरफ से सोशल मीडिया पर मनोवैज्ञानिक युद्ध जारी है। जहां भाजपा का सोशल मीडिया देशवासियों को मुसलमानों का डर दिखाने में जुटा है, वहीं  विपक्षी मीडिया, जो अभी कम आक्रामक

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मोदी जी की साफ नीयत: सही विकास

राजनेताओं द्वारा जनता को नारे देकर, लुभाने का काम लंबे समय से चल रहा है। ‘जय जवान-जय किसान’, ‘गरीबी हटाओ’, ‘लोकतंत्र बचाओ’, ‘पार्टी विद् अ डिफरेंस’ व पिछले चुनाव में भाजपा का नारा था, ‘मोदी लाओ-देश बचाओ’। जब से मोदी जी सत्ता में आऐ हैं, भारत को परिवर्तन की ओर ले जाने के लिए उन्होंने बहुत सारे नये नारे दिये, जिनमें से एक है, ‘साफ नीयत-सही विकास’।

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