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Social Issues

 "One of the things I learned is that you've got to deal with the underlying social problems if you want to have an impact on crime - that it's not a coincidence that you see the greatest amount of violent crime where you see the greatest amount of social dysfunction". - Eric Holder

 

 

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धर्म आस्था और आत्मोत्थान का माध्यम होता है। इसका प्रदर्शन यदि उत्सव के रूप में किया जाए, तो वह एक सामाजिक-सांस्कृतिक घटना मानी जाती है। जिसका सभी आनंद लेते हैं। चाहे विधर्मी ही क्यों न हों। दीपावली, ईद, होली, वैशाखी, क्रिसमस, पोंगल, संक्राति व नवरोज आदि ऐसे उत्सव हैं, जिनमें दूसरे धर्मों के मानने वाले भी उत्साह से भाग लेते हैं। अपने-अपने धर्मों की शोभा यात्राऐं निकालना,

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जम्मू के कठुआ में आठ साल की एक मासूम बच्ची आसिफा के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में उपलब्ध तमाम वैज्ञानिक सबूतों, प्रमाणों और तथ्यों को झुठलाते हुए अखबार 'दैनिक जागरण' ने अपने जम्मू सहित कई संस्करणों के हैडलाइन में जो खबर लगाई है, वह यह है - 'बच्ची के साथ नहीं हुआ दुष्कर्म' ! मनगढंत तथ्यों के आधार पर बनाई गई 'जागरण' की इस खबर

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आज इक्कीसवीं सदी में भी काल्पनिक जातीय स्वाभिमान की बुनियाद पर खड़ी करणी सेना जैसी जातीय सेनाओं से जैसी मूर्खता और उद्दंडता की उम्मीद होती है, वह वैसा ही आचरण कर रही है। घटनाक्रम का दुखद पक्ष यह है कि करणी सेना के बहाने समूची राजपूत जाति को कायर बताकर लांछित और कलंकित करने का सुनियोजित अभियान सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा है।

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हमारे पुराणों में वर्णित समुद्र-मंथन या अमृत-मंथन कोई अलौकिक घटना नहीं, सामंतों और संपन्न व्यवसायी वर्ग द्वारा मेहनतकशों के शोषण का आख्यान है। प्राचीन भारत में उत्तर तथा पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में रहने वाली आर्य जातियां अपने को देव कहती थीं। पूर्वी और दक्षिणी भारत में अपने विस्तार के क्रम में उनका उन क्षेत्रों के मूल निवासी असुर, नाग, दैत्य, दानव

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एस.सी / एस.टी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के एक संशोधन के बाद कुछ दलित संगठनों द्वारा आज भारत बंद के आह्वान का समर्थन वस्तुतः क़ानून के राज का निषेध है। दलितों के अधिकार और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए बनाया गया यह कानून एक प्रगतिशील और ज़रूरी कदम था, लेकिन सच यह भी है कि इस क़ानून का दुरूपयोग भी बहुत हुआ है। इस क़ानून का ही क्यों, आई.पी.सी की धाराओं

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राष्ट्रवाद और देशभक्ति की लगातार उटपटांग परिभाषाएं गढ़ने वाले कथित राष्ट्रवादी इन दिनों देश के मुसलमानों और खुद को धर्मनिरपेक्ष मानने वाले लोगों से एक सवाल अक्सर पूछते हैं - धर्म बड़ा या देश ? सोशल मीडिया उनकी ऐसी जिज्ञासाओं से पटा हुआ मिलता है। इस सवाल के पीछे कोई दृष्टि अथवा जिज्ञासा नहीं, चिढ़ाने की भावना ही ज्यादा होती है।

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केंद्र और राज्य की सरकारें, हमारे धर्मक्षेत्रों को सजाए-संवारे तो सबसे ज्यादा हर्ष, हम जैसे करोड़ों धर्म प्रेमियों को होगा। पर धाम सेवा के नाम पर, अगर छलावा, ढोंग और घोटाले होंगे, तो भगवान तो रूष्ट होंगे ही, भाजपा की भी छवि खराब होगी। इसलिए हमारी बात को ‘निंदक नियरे राखिए’ वाली भावना से अगर उ.प्र. के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी सुनेंगे, तो उन्हें लोक और परलोक में यश मिलेगा।

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हमारे देश में कैंसर रोगियों की बढ़ती संख्या के मद्देनज़र विख्यात प्राकृतिक चिकित्सक और चिकित्सा लेखक डॉ अबरार मुल्तानी ने सरकार की कैंसर नीति के बारे में कुछ बहुत ज़रूरी सवाल उठाए हैं जिनपर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। सरकारी विज्ञापनों को देखें तो महसूस होगा कि कैंसर का एकमात्र या उसका सबसे बड़ा कारक तम्बाकू है। यह एक अर्द्धसत्य है।

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कभी आपने सोचा है कि कुछ अपवादों को छोड़कर सृष्टि के समय से लेकर आजतक हमारी दुनिया इस क़दर अराजक, अव्यवस्थित, क्रूर और अमानवीय क्यों रही है ? किसी भी युग में झांककर देखिए तो ऐसा नहीं लगेगा कि यह दुनिया कभी जीने के लायक भी रही है। वह शायद इसीलिए कि दुनिया को बनाने, चलाने और मिटाने वाला ईश्वर हमेशा से पुरुष रहा है।

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2014 में जब नरेन्द्र मोदी पूर्णं बहुमत लेकर सत्ता में आऐ, तो सारी दुनिया के हिंदुओं ने खुशी मनाई कि लगभग 1000 साल बाद भारत में हिंदू राज की स्थापना हुई है। नरेन्द्र भाई का व्यक्तिगत जीवन आस्थावान रहा है। हिमालय में तप करने से लेकर भारत की सनातन परंपराओं के प्रति उनकी आस्था ने भारत को हिंदू राष्ट्र बनने की संभावनाओं को बढ़ा दिया। पर आज हिंदू राष्ट्र का सपना

True Love


My Perception:----The whole world is based on Love and EMOTIONs.It is Emotions that rule the world and everyone in the world is EMOTIONAL.I encourage Love marriages.
Introduction:---
The word LOVE can have a variety of meanings in different contexts.

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PRESS RELEASE OF AETM 2018

Research education is having an ageless impression for its most dynamic future and it is exclusively notable for the researchers to find the indelible discovery. 4th International Conference on Advancements in Engineering, Technology and Management has taken place at “The Ten, Eastin Hotel, Makassan, Bangkok, Thailand,

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चुनावी माहौल में उलझते बुनियादी सवाल

2019 के चुनावों की पेशबंदी शुरू हो गयी है। जहां एक तरफ भाजपा भविष्य के खतरे को देखते हुए रूठे साथियों को मनाने में जुटी है, वहीं विपक्षी दल आपसी तालमेल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। दोनों ही पक्षों की तरफ से सोशल मीडिया पर मनोवैज्ञानिक युद्ध जारी है। जहां भाजपा का सोशल मीडिया देशवासियों को मुसलमानों का डर दिखाने में जुटा है, वहीं  विपक्षी मीडिया, जो अभी कम आक्रामक

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