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विचित्र लगता है कि बिहार में देवी का एक ऐसा मंदिर भी है जिसमें स्त्री-शक्ति के सम्मान के नौ दिवसीय पर्व नवरात्रि का आरम्भ होते ही स्त्रियों का प्रवेश वर्जित हो जाता है। यह मंदिर है बिहार के नालंदा जिले में बुद्ध की कर्मभूमि राजगीर और महावीर के निर्वाण-स्थल पावापुरी के बीच ग्राम घोसरावां स्थित माता आशापुरी मंदिर। मगध साम्राज्य के पाल काल में

निर्मित इस प्राचीन मंदिर में मां दुर्गा की अष्टभुजी प्रतिमा स्थापित है। नवरात्रि के पर्व के दौरान इस मंदिर में आम श्रद्धालुओं के अलावा देश भर से आने वाले तांत्रिक साधकों की भीड़ लगती है। दुर्भाग्य यह की श्रद्धालुओं की इस भीड़ का हिस्सा वे स्त्रियां नहीं होती जिनके प्रति सम्मान के लिए यह समूचा आयोजन निर्धारित है। यहां के लोग बताते हैं कि स्त्रियों के प्रति पक्षपातपूर्ण और अपमानजनक यह परंपरा जाने कितनी सदियों से चली आ रही है। इस परंपरा के विरोध की कभी कोई पहल नहीं हुई। यहां के पुरुषों को कोई फ़र्क नहीं पड़ता और यहां की स्त्रियों ने बेमन से ही सही , इस परंपरा को अपनी नियति मान कर स्वीकार किया हुआ है। क्या बिहार की सरकार, स्थानीय प्रशासन और बिहार में स्त्रियों के अधिकार के लिए लड़ रहे संगठनों की यह ज़िम्मेदारी नहीं बनती कि वे मंदिर की स्त्री-विरोधी परंपरा के खिलाफ़ कोई सार्थक पहल करें ?
(सूचना आज के 'हिंदुस्तान' दैनिक से साभार}

 

Courtesy: Dhruv Gupt

The Exemplary Educational Reward

Dr. Rumki Gupta, Eminent Scientist, Psychology Research Unit, Indian Statistical Institute, Kolkata, India has achieved the mindboggling academic cognizance in International Conference on Interdisciplinary Research and Technological Developments, which has taken place on 28th October, 2017 at Hotel Shambala in Kathmandu, Nepal.

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DEMONETISATION 2016

On November  8th 2016  our Honourable Prime Minister Narendra Damodardas MODI    urf MODIji made a great announcement of “ Chalanbandi “, “ Vimudrikaran “   “ DEMONETISATION  ”.  And from Nov. 9th to Dec 30th he put a BAN on all 500 and 1000 notes.PM Modiji announced on Nov 8th that the high value currency

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हमसे नज़रिया काहे फेरी हो बालम !

पिछली रात दिल का दौरा पड़ने से देश की महानतम शास्त्रीय गायिकाओं में एक 88-वर्षीय गिरिजा देवी का पिछली रात निधन भारतीय संगीत प्रेमियों के लिए सदमें जैसा है।कल तक वे अपनी पीढ़ी की अंतिम जीवित गायिका थीं। बनारस घराने की इस विलक्षण गायिका को ठुमरी और दादरा जैसी उपशास्त्रीय और लोक गायन की शैलियों को लोकप्रियता का शिखर देने का श्रेय जाता है।

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